(डाउनलोड) एनसीईआरटी संस्कृत ( कक्षा 9-10) के संशोधित पाठ्यक्रम

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(डाउनलोड) एनसीईआरटी संस्कृत ( कक्षा 9-10) के संशोधित पाठ्यक्रम

भूमिका

संस्कृत विष्व की एक प्राचीनतम भाषा है। इसका साहित्य ऋग्वेद-काल से लेकर आज तक अबाध गति से प्रवाहित है। ज्ञान-विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में जितने ग्रन्थ इस भाषा में लिखे गए हैं उतने किसी अन्य प्राचीन भाषा में नहीं प्राप्त होते। अधिकांष भारतीय भाषाओं में संस्कृत शब्दांे की बहुलता है। अतः संस्कृत भाषा का ज्ञान अन्य भारतीय भाषाओं के सीखने में सहायक सिद्ध होता है। संस्कृत भाषा और साहित्य का राष्ट्रीय एकता की दृष्टि से बहुत महत्त्व है। संस्कृत साहित्य की मूल चेतना, (विविधता को बनाए रखते हुए) भारत को एक राष्ट्र के रूप में देखने की है। भारतवर्ष में क्षेत्रीय विषमताओं के होने पर भी जिन तत्त्वों ने इस देष को एक सूत्र में बाँध रखा है उनमें संस्कृत भाषा तथा इसका साहित्य प्रमुख है। संस्कृत साहित्य ने उत्तर-दक्षिण या पूर्व-पष्चिम का भेदभाव मिटाकर प्रत्येक नागरिक को भारतीय होने का स्वाभिमान प्रदान किया है। इस भाषा में भारतीय सभ्यता, धर्म, दर्षन, इतिहास, पुराण, भूगोल, राजनीति एवं विज्ञान का प्रचुर साहित्य प्रत्येक विधा में तथा समकालीन साहित्य भी विपुल मात्रा में उपलब्ध है जिसका अनुषीलन समाज के लिए अत्यन्त उपयोगी है।

संस्कृत को केवल एक प्राचीन भाषा मानना ही पर्याप्त नहीं है। आधुनिक संस्कृत अन्य भारतीय भाषाओं की तरह भारतीय बहुभाषिकता की एक अभिन्न अंग है। जिस प्रकार बहुभाषी कक्षा में अन्य भाषाओं के सीखने में संस्कृत सहायक होती है उसी प्रकार संस्कृत भाषा को सीखने में अन्य भाषाओं का सहयोग भी लिया जा सकता है। बहुभाषिकता के प्रति आदर एक ऐसा सषक्त दृष्टिकोण है, जिससे भाषा-षिक्षण की पूरी विधि ही बदल सकती है। इसी दृष्टिकोण से माध्यमिक स्तर पर (कक्षा प्ग्दृग्) संस्कृत के पठन-पाठन के लिए पाठ्यक्रम विकसित किया गया है।
 

सामान्य उद्देष्य

माध्यमिक स्तर पर संस्कृत के पठन-पाठन के निम्नलिखित उद्देष्य हैं:

  • संस्कृत भाषा का सामान्य ज्ञान कराना जिससे संस्कृत के सरलांषों को सुनकर या पढ़कर विद्यार्थी समझ सकें एवं मौखिक तथा लिखित अभिव्यक्ति कर सकें।
  • स्स्कृत साहित्य के प्रति विद्यार्थियों में अभिरुचि उत्पन्न करना।
  • संस्कृत साहित्य की प्रमुख विधाओं की प्रतिनिधि रचनाओं (प्राचीन एवं अर्वाचीन) से विद्यार्थियों का परिचय कराना।
  • विद्यार्थियों में राष्ट्रीय, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं नैतिक मूल्यों को विकसित करना।

विषिष्ट उद्देष्य

श्रवण

  •  कक्षा में अध्यापक अथवा सहपाठी द्वारा पढ़े गए पाठ अथवा कहे गए विचारों को ध्यानपूर्वक सुनना तथा सार ग्रहण करते हुए अपेक्षित क्रिया करना।
  •  रेडियो तथा दूरदर्षन द्वारा प्रसारित संस्कृत कार्यक्रमों को ध्यानपूर्वक सुनना तथा समझना।
  •  सहपाठी तथा अध्यापक के कथनों को सुनकर प्रष्न पूछना।

वाचन (भाषण)

  •  पठित सामग्री पर पूछे गए प्रष्नों का उत्तर दे सकना।
  •  अपने विचारों को प्रकट करते समय उचित शब्दों पर बलाघात करते हुए बोल सकना।
  •  प्रष्नवाचक आदि भावों को समाहित करते हुए अपने विचारों को स्पष्टता, तथा विनम्रता के साथ प्रकट कर सकना।

पठन

  •  संस्कृत के गद्य तथा पद्य खण्डों तथा नाट्यांषों का स्पष्ट तथा शुद्ध पाठ करते हुए सारांष समझ सकना।
  •  संस्कृत वाक्यों का प्रवाह के साथ पाठ कर सकना।
  •  पाठ्यपुस्तक में प्रयुक्त छंदों (पद्यों) का लय के अनुसार सस्वर पाठ करना।

लेखन एवं रचना

  •  संस्कृत के पठित पदों तथा वाक्यों को सुनकर उन्हें शुद्ध वर्तनी में लिख सकना।
  •  संधियुक्त गद्यांषों का अनुलेखन कर सकना।
  •  पठित कहानी या उसके अंष का सार संस्कृत (पाँच वाक्यों) में लिख सकना।
  •  किसी परिचित विषय अथवा पठित विषय पर सरल संस्कृत वाक्यों में अपने भाव अभिव्यक्त कर सकना।
  •  किसी संस्कृत कहानी अथवा निबंध को पढ़कर उसके लिए उचित शीर्षक सुझा सकना।

स्तरांत क्षमताएँ

कक्षा 9 तथा 10वीं में संस्कृत पढ़ने के पष्चात् विद्यार्थियों में निम्नलिखित क्षमताओं का विकास हो सकेगा-

  •  विद्यार्थी संस्कृत में पूछे गए सरल एवं लघु प्रष्नों का उत्तर दे सकेगा।
  •  किसी परिचित वस्तु, स्थान एवं घटना का पाँच छोटे-छोटे संस्कृत वाक्यों में वर्णन कर सकेगा।
  •  पठित सामग्री पर पूछे गए प्रष्नों के उत्तर दे सकेगा।
  •  सहपाठी तथा अध्यापक के विचारों को सुनकर प्रष्न पूछ सकेगा।
  •  संस्कृत के गद्य, पद्य एवं नाट्यांष खण्डों का प्रवाह तथा उचित लय एवं गति के साथ पाठ कर सकेगा।
  •  संस्कृत के गद्य खण्डों तथा पद्य का शुद्ध-षुद्ध पाठ करते हुए सारांष समझ सकेगा।
  •  पठित कहानी या पाठ का सारांष संस्कृत के पाँच वाक्यों में लिख सकेगा।
  •  किसी संस्कृत कहानी एवं निबन्ध को पढ़कर उसके लिए उचित शीर्षक सुझा सकेगा।
  •  किसी पठित अथवा सुने हुए विषयों में विद्यमान गुण-दोषों अथवा मूल्यों के सन्दर्भ में अपना मत रख सकेगा।

पाठ्यक्रम एवं पाठ्य सामग्री

कक्षा 9 तथा 10वीं के लिए निम्नलिखित पाठ्यसामग्री होगी:
1  पाठ्यपुस्तक 50 अंक
2  व्याकरण एवं रचना 50 अंक

कक्षा 9 तथा 10 के लिए एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा निर्मित एक-एक पाठ्यपुस्तक निर्धारित होगी जिसमें 12दृ12 पाठ होंगे। 75 प्रतिषत पाठ संकलित तथा 25 प्रतिषत पाठ लिखित हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त दोनों ही कक्षाओं के लिये दु्रतपाठ के रूप में निर्मित एक अन्य पुस्तक का प्रावधान वांछनीय है। एतदर्थ एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा प्रकाषित की जाने वाली सूक्तिसौरभम् द्वितीय पुष्पम् को अनुषंसित किया जा सकता है। विद्यार्थियों की सहायता हेतु प्रायोगिक व्याकरण की एक अलग पुस्तक वांछनीय है। एतदर्थ एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा निर्मित व्याकरण की पुस्तक को अनुषंसित किया जा सकता है।

पाठ्य-विषय

पाठ्यविषय के रूप में आकर्षक कथा, सरल संवाद, नाटकीय दृष्य, लघु वर्णन, सुन्दर, सुबोध एवं षिक्षाप्रद श्लोक, गेय ललित पद्य, प्रकृति वर्णन, विषिष्ट बालक, बालिकाओं एवं महापुरुषों के जीवन-चरित्र आदि को आधार बनाया जा सकता है। विषय-चयन के समय इस बात का ध्यान रखना होगा कि पाठों में विविधता एवं रोचकता बनी रहे। प्रत्येक पाठ्यपुस्तक में लगभग 20 प्रतिषत अन्य भाषाओं का संस्कृत अनुवाद तथा 30 प्रतिषत नवीन मौलिक साहित्य का समावेष किया जाना चाहिए।

कक्षा 11  के लिए व्याकरण

 

अंक

1 वर्ण परिचय तथा उच्चारण-स्थान।

2

2 संधि परिचय तथा उसके भेद-स्वर संधि, दीर्घ, गुण, यण्, वृद्धि आदि।

 6 

3 शब्दरूप 

 3

(क) स्वरान्त-बालक, फल, लता, मुनि, पति, भूपति, नदी, भानु, धेनु, मधु, पितृ, मातृ आदि।
(ख) व्यंजनान्त-राजन्, भवत्, आत्मन्, विद्वस्, चन्द्रमस्, वाच्, गच्छत् (षत्रन्त)।
(ग) सर्वनाम-सर्व, यत्, तत्, किम्, इदम् (सभी लिंगों में) अस्मद् तथा युष्मद्।
(घ) संख्यावाची शब्द-एक से पचास तक।

4 धातुरूप - (लट्, लङ्, लृट्, लोट्, विधिलिङ्,) 

3

(क) भ्वादिगण- भू, पा, श्रु, गम्, पच्, पठ्, लिख्, स्था, दृष्, अस्, सेव्, लभ्।
(ख) अदादिगण-अद्, ब्रू
(ग) स्वादि गण- चि (चुनना), शक्
(घ) तुदादिगण-तुद्, इष्, मिल्, सिच्
(ङ) क्र् यादिगण- क्री
(च) चुरादिगण- चुर्, भक्ष्, कथ

 

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