NEW!  Sample Papers Books : Class-X, Class-XII 

CBSE Class-10 Exam 2017 : Delhi Scheme Question Paper, Hindi-A

CBSE Class-10 Exam 2017 : Delhi Scheme

Question Paper, Hindi-A

CBSE Class-10 Exam 2017 :  Hindi-A (Set-1)

हिन्दी
HINDI
(पाठ्यक्रम अ)
(Course A)
निर्धारित समय : ३ घण्र्टे
अधिकतम अंक : ९०
Time allowed : 3 hours ]
[ Maximum marks : 90
सामान्य निर्देशः
(1) इस प्रश्न-पत्र के चार खंड हैं- क, ख, ग और घ।
(2) चारों खंडों के प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य  है।
(3) यथासंभव प्रत्येक खंड के उत्तर क्रमश: दीजिए।
 
खंड ‘क
१. निम्नलिखित गद्यांश को प‹ढकर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए- १
देश की आजादी के उनहत्तर वर्ष हो चुके हैं और आज जरूरत है अपने भीतर के तर्कप्रिय भारतीयों को जगाने की, पहले नागरिक और फिर उपभोक्ता बनने की। हमारा
लोकतंत्र इसलिए बचा है कि हम सवाल उठाते रहे हैं। लेकिन वह बेहतर इसलिए नहीं बन पाया क्योंकि एक नागरिक के रूप में हम अपनी μिजम्मेदारियों से भागते रहे हैं। किसी
भी लोकतांत्रिक प्रणाली की सफलता जनता की जागरूकता पर ही निर्भर करती है। एक बहुत ब‹डे संविधान विशेषज्ञ के अनुसार किसी मंत्री का सबसे प्राथमिक, सबसे
पहला जो गुण होना चाहिए वह यह कि वह ई ानदार हो और उसे भ्रष्ट नहीं बनाया जा सके। इतना ही जरूरी नहीं, बल्कि लोग देखें और समझें भी कि यह आदमी ई ानदार
है। उन्हें उसकी ई ानदारी में विश्वास भी होना चाहिए। इसलिए कुल मिलाकर हमारे लोकतंत्र की समस्या मूलत: नैतिक समस्या है। संविधान, शासन प्रणाली, दल, निर्वाचन
ये सब लोकतंत्र के अनिवार्य अंग हैं। पर जब तक लोगों में नैतिकता की भावना न रहेगी, लोगों का आचार-विचार ठीक न रहेगा तब तक अच्छे से अच्छे संविधान और
उत्तम राजनीतिक प्रणाली के बावμजूद लोकतंत्र ठीक से काम नहीं कर सकता। स्पष्ट है कि लोकतंत्र की भावना को जगाने व संवद्र्धित करने के लिए आधार प्रस्तुत करने की
μिजम्मेदारी राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक है। आμजादी और लोकतंत्र के साथ जु‹डे सपनों को साकार करना है, तो सबसे पहले जनता को स्वयं जाग्रत होना होगा। जब तक स्वयं जनता का नेतृत्व पैदा नहीं होता, तब तक कोई भी लोकतंत्र सफलतापूर्वक नहीं चल सकता। सारी दुनिया में एक भी देश का उदाहरण ऐसा नहीं मिलेगा जिसका उत्थान केवल राज्य की शक्ति द्वारा हुआ हो। कोई भी राज्य बिना लोगों की शक्ति के आगे नहीं ब‹ढ सकता।
 
 

Click Here to Download 

CBSE Class-10 Exam 2017 :  Hindi-A (Set-2)

हिन्दी
HINDI
(पाठ्यक्रम अ)
(Course A)
निर्धारित समय : ३ घण्र्टे
अधिकतम अंक : ९०
Time allowed : 3 hours ] 
[ Maximum marks : 90
 
सामान्य निर्देशः
(1) इस प्रश्न-पत्र के चार खंड हैं- क, ख, ग और घ।
(2) चारों खंडों के प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य  है।
(3) यथासंभव प्रत्येक खंड के उत्तर क्रमश: दीजिए।
खंड ‘कङ्क
१. निम्नलिखित गद्यांश को प‹ढकर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए- १
गीता के इस उपदेश की लोग प्राय: चर्चा करते हैं कि कर्म करें, फल की इच्छा न करें। यह कहना तो सरल है पर पालन उतना सरल नहीं। कर्म के मार्ग पर आनन्दपूर्वक चलता
हुआ उत्साही मनुष्य यदि अन्तिम फल तक न भी पहुँचे तो भी उसकी दशा कर्म न क रने वाले की अपेक्षा अधिकतर अवस्थाओं में अच्छी रहेगी, क्योंकि एक तो कर्म करते हुए
उसका जो जीवन बीता वह संतोष या आनन्द में बीता, उसके उपरांत फल की अप्राप्ति पर भी उसे यह पछतावा न रहा कि मैंने प्रयत्न नहीं किया। फल पहले से कोई बना-
बनाया पदार्थ नहीं होता। अनुकूल प्रयत्न-कर्म के अनुसार, उसके एक-एक अंग की योजना होती है। किसी मनुष्य के घर का कोई प्राणी बीमार है। वह वैद्यों के यहाँ से जब
तक औषधि ला-लाकर रोगी को देता जाता है तब तक उसके चित्त में जो संतोष रहता है, प्रत्येक नए उपचार के साथ जो आनन्द का उन्मेष होता रहता है- यह उसे कदापि न
प्राप्त होता, यदि वह रोता हुआ बैठा रहता। प्रयत्न की अवस्था में उसके जीवन का जितना अंश संतोष, आशा और उत्साह में बीता, अप्रयत्न की दशा में उतना ही अंश केवल शोक और दुख में कटता। इसके अतिरिक्त रोगी के न अच्छे होने की दशा में भी वह आत्म-ग्लानि के उस कठोर दुख से बचा रहेगा जो उसे जीवन भर यह सोच-सोच कर होता कि मैंने पूरा प्रयत्न नहीं किया। कर्म में आनन्द अनुभव करने वालों का नाम ही कर्मण्य है। धर्म और उदारता के उच्च कर्मों के विधान में ही एक ऐसा दिव्य आनन्द भरा रहता है कि कर्ता को वे कर्म ही
फल-स्वरूप लगते हैं। अत्याचार का दमन और शमन करते हुए कर्म करने से चित्त में जो तुष्टि होती है वही लोकोपकारी कर्मवीर का सच्चा सुख है।

Click Here to Download 

CBSE Class-10 Exam 2017 :  Hindi-A (Set-3)

हिन्दी
HINDI
(पाठ्यक्रम अ)
(Course A)
निर्धारित समय : ३ घण्र्टे
अधिकतम अंक : ९०
Time allowed : 3 hours ] 
[ Maximum marks : 90
सामान्य निर्देशः
(1) इस प्रश्न-पत्र के चार खंड हैं- क, ख, ग और घ।
(2) चारों खंडों के प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य  है।
(3) यथासंभव प्रत्येक खंड के उत्तर क्रमश: दीजिए।
 
खंड ‘क
१. निम्नलिखित गद्यांश को प‹ढकर पूछे गए प्रश्नों के लिए सही विकल्प चुनकर लिखिए- १
देश की आजादी के उनहत्तर वर्ष हो चुके हैं और आज जरूरत है अपने भीतर के तर्कप्रिय भारतीयों को जगाने की, पहले नागरिक और फिर उपभोक्ता बनने की। हमारा
लोकतंत्र इसलिए बचा है कि हम सवाल उठाते रहे हैं। लेकिन वह बेहतर इसलिए नहीं बन पाया क्योंकि एक नागरिक के रूप में हम अपनी μिजम्मेदारियों से भागते रहे हैं। किसी
भी लोकतांत्रिक प्रणाली की सफलता जनता की जागरूकता पर ही निर्भर करती है। एक बहुत ब‹डे संविधान विशेषज्ञ के अनुसार किसी मंत्री का सबसे प्राथमिक, सबसे
पहला जो गुण होना चाहिए वह यह कि वह ई ानदार हो और उसे भ्रष्ट नहीं बनाया जा सके। इतना ही जरूरी नहीं, बल्कि लोग देखें और समझें भी कि यह आदमी ई ानदार
है। उन्हें उसकी ई ानदारी में विश्वास भी होना चाहिए। इसलिए कुल मिलाकर हमारे लोकतंत्र की समस्या मूलत: नैतिक समस्या है। संविधान, शासन प्रणाली, दल, निर्वाचन
ये सब लोकतंत्र के अनिवार्य अंग हैं। पर जब तक लोगों में नैतिकता की भावना न रहेगी, लोगों का आचार-विचार ठीक न रहेगा तब तक अच्छे से अच्छे संविधान और
उत्तम राजनीतिक प्रणाली के बावμजूद लोकतंत्र ठीक से काम नहीं कर सकता। स्पष्ट है कि लोकतंत्र की भावना को जगाने व संवद्र्धित करने के लिए आधार प्रस्तुत करने की
μिजम्मेदारी राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक है। आμजादी और लोकतंत्र के साथ जु‹डे सपनों को साकार करना है, तो सबसे पहले जनता को स्वयं जाग्रत होना होगा। जब तक स्वयं जनता का नेतृत्व पैदा नहीं होता, तब तक कोई भी लोकतंत्र सफलतापूर्वक नहीं चल सकता। सारी दुनिया में एक भी देश का उदाहरण ऐसा नहीं मिलेगा जिसका उत्थान केवल राज्य की शक्ति द्वारा हुआ हो। कोई भी राज्य बिना लोगों की शक्ति के आगे नहीं ब‹ढ सकता।
 
(क) लगभग ७० वर्ष की आजादी के बाद नागरिकों से लेखक की अपेक्षाएँ हैं कि वे :
(1) समझदार हों
(2) प्रश्न करने वाले हों
(3) जगी हुई युवा पी‹ढी के हों
(4) मजबूत सरकार चाहने वाले हों
 
(ख) हमारे लोकतांत्रिक देश में अभाव है :
(1) सौहार्द का
(2) सद्भावना का
(3) जिम्मेदार नागरिकों का
(4) एकमत पार्टी का
 
(ग) किसी मंत्री की विशेषता होनी चाहिए :
(1) देश की बागडोर सँभालनेवाला
(2) मिलनसार और समझदार
(3) सुशिक्षित और धनवान
(4) ई ानदार और विश्वसनीय
 
(घ) किसी भी लोकतंत्र की सफलता निर्भर करती है :
(1) लोगों में स्वयं ही नेतृत्व भावना हो
(2) सत्ता पर पूरा विश्वास हो
(3) देश और देशवासियों से प्यार हो
(4) समाज-सुधारकों पर भरोसा हो
 

Click Here to Download 

Courtesy: CBSE